कोरिया के बसवाही गांव की अनोखी परंपरा, दैवीय आपदा से बचने 7 दिन पहले मनाई जाती है होली

RAIPUR KI BAAT
0

 

मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर: लोगों की सबसे प्रिय उमंग एवं उत्साह का सबसे खास फागुन का त्योहार आने वाला है. छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में इस बार 3 मार्च को होली मनाई जाएगी. लेकिन कोरिया के सोनहत विकासखंड के बसवाही गांव में आज ही होली मनाई गई. जिस तरह से होली के दिन लोग रंग गुलाल लगाते हैं, ठीक उसी तरह से यहां आज रंग गुलाल लगाकर और फाग गीत गाकर होली मनाई गई.

1 हफ्ते पहले मनाई जाती है होली

गांव में दशकों से चली आ रही निर्धारित परंपरा के अनुसार सबसे पहले विधि-विधान से सम्मत (होलिका दहन) किया गया. इसके अगले दिन ग्रामीणों ने रंग-गुलाल के साथ जमकर होली खेली. इस दौरान गांव की गलियां रंगों से सराबोर नजर आई. बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी ने बढ़-चढ़कर होली खेली और पारंपरिक फाग गीतों पर जमकर झूमे.


पूर्वजों के समय से चली आ रही परंपरा

ग्रामीणों के अनुसार बसवाही गांव में एक हफ्ते पहले होली खेलने यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है. गांव के लोग कैलेंडर में निर्धारित तिथि से ठीक एक सप्ताह पहले सम्मत जलाकर होली मनाते हैं. उनका मानना है कि यह परंपरा उन्हें अपने पूर्वजों से विरासत में मिली है, जिसे निभाना उनका कर्तव्य है.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि तय परंपरा के अनुसार होली नहीं मनाई गई तो गांव में विपदा आ सकती है, ग्राम देवता नाराज हो सकते हैं. इसी आस्था और विश्वास के चलते हर वर्ष यह परंपरा पूरी श्रद्धा और नियम के साथ निभाई जाती है.

फाग गीतों पर झूमे गांववाले

होली के अवसर पर गांव में पारंपरिक फाग गीतों की गूंज सुनाई दी. मांदर की थाप पर युवक-युवतियां और बुजुर्ग थिरकते नजर आए. रंग-गुलाल के बीच आपसी भाईचारे और सौहार्द का माहौल पूरे गांव में देखने को मिला. महिलाओं ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई और पारंपरिक गीतों से माहौल को उत्सव जैसा बना दिया. बसवाही गांव की यह अनोखी परंपरा न केवल सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम कर रही है. बसवाही गांव की यह परंपरा आधुनिकता के दौर में भी इस तरह की परंपराएं ग्रामीण संस्कृति की जीवंतता का परिचय देती हैं.


हमारे गांव में यह परंपरा पुरखों के समय से चली आ रही है. हम लोग हर साल एक सप्ताह पहले ही सम्मत जलाकर होली मनाते हैं. गांव के देवता की मान्यता है, इसलिए पूरे गांव के लोग मिलकर इस परंपरा को निभाते हैं. हम मानते हैं कि अगर परंपरा के अनुसार होली नहीं मनाई गई तो गांव में अनहोनी हो सकती है. इसलिए सभी ग्रामीण एकजुट होकर पूरे उत्साह के साथ होली मनाते हैं: राम सिंह, ग्रामीण, बसवाही गांव

Post a Comment

0 Comments
Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

you are welcome. Check Out
Ok, Go it!
To Top