पारंपरिक लोहारी से आत्मनिर्भरता का सफर

RAIPUR KI BAAT
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मेहनत और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के समन्वय से बालोद जिले के ग्राम बघमरा की संतोषी बाई विश्वकर्मा के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। पारंपरिक रूप से लोहारी कार्य से जुड़ी संतोषी बाई आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर उभरी हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत साबित हो रही हैं।

संतोषी बाई एवं उनके पति वर्षों से कृषि उपकरणों जैसे कुदाल, टंगिया (कुल्हाड़ी) और हंसिया का निर्माण करते आ रहे हैं। आधुनिकता के इस दौर में भी उन्होंने अपने पारंपरिक व्यवसाय को न केवल जीवित रखा, बल्कि उसे आजीविका का सशक्त माध्यम बनाया है। उनके द्वारा निर्मित औजारों की स्थानीय किसानों के बीच अच्छी मांग है, जो उनकी मेहनत और गुणवत्ता का प्रमाण है। भूमिहीन कृषि मजदूर के रूप में जीवन यापन कर रही संतोषी बाई को शासन की योजनाओं से महत्वपूर्ण संबल मिला। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के अंतर्गत प्राप्त 10 हजार रूपए की वार्षिक सहायता एवं महतारी वंदन योजना से मिलने वाली प्रतिमाह 1000 रूपए की राशि से उनके जीवन स्तर बेहतर हुआ है।
पूर्व में कच्चे मकान में जीवन यापन करने वाली संतोषी बाई को प्रधानमंत्री आवास योजना की बदौलत परिवार के लिए पक्का और सुरक्षित आवास मिला है। संतोषी बाई ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं ने उनके जीवन में स्थायित्व, सुरक्षा और सम्मान प्रदान किया है।

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