रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान मिशन के आखिरी दिन बस्तर रेंज में 44 माओवादी कैडरों ने सरेंडर किया। नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा का मार्ग अपनाया, जो क्षेत्र में शांति और विश्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बता दें कि केंद्र सरकार ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए 31 मार्च 2026 की डेडलाइन तय की थी।
इसके साथ ही विभिन्न माओवादी डंप और कैडरों से कुल 217 हथियार बरामद किए गए हैं। जिनमें LMG, AK-47, INSAS और SLR राइफलें शामिल हैं। यह बरामदगी माओवादी संगठन की सैन्य क्षमता के अंत का स्पष्ट संकेत है। बीजापुर से 2.90 करोड़ तथा जिला सुकमा से 10 लाख रुपये माओवादी डंप से बरामद किए गए। जिन्हें भी मिशन के इस निर्णायक दिन प्रदर्शित किया गया।
माओवाद के खिलाफ निर्णायक बढ़त
अधिकारियों ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ संघर्ष में बस्तर रेंज ने निर्णायक बढ़त हासिल की है। आज की ये उपलब्धियां स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि मिशन 2026 अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। भारत सरकार, छत्तीसगढ़ सरकार तथा बस्तर क्षेत्र की स्थानीय जनता की लंबे समय से रही आकांक्षा के अनुरूप नक्सल उन्मूलन की दिशा में चल रहे “मिशन 2026” के तहत 31 मार्च 2026 का दिन बस्तर रेंज के लिए एक महत्वपूर्ण और निर्णायक पड़ाव के रूप में सामने आया है।
किस जिले में कितने नक्सलियों का सरेंडर
बीजापुर में 25 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। इसके साथ ही 93 हथियार बरामद किए गए। इसके अतिरिक्त लगभग 14.06 करोड़ की डंप रिकवरी की गई।
दंतेवाड़ा में 5 कैडरों ने आत्मसमर्पण किया तथा 8 SLR, 3 इंसास राइफल सहित कुल 40 हथियार बरामद किए गए।
सुकमा में 2 कैडरों के आत्मसमर्पण के साथ 1 LMG, 2 AK-47 राइफल तथा 3 .303 राइफल सहित कुल 6 हथियार बरामद किए गए। इसके साथ ही 10 लाख नकद भी बरामद हुआ।
नारायणपुर में 1 कैडर के आत्मसमर्पण के साथ 1 LMG, 2 .303 राइफल तथा 6 BGL लॉन्चर सहित कुल 59 हथियार बरामद किए गए।
कांकेर में पिछले छह दिनों के भीतर 11 कैडरों ने आत्मसमर्पण किया तथा 1 AK-47, 1 इंसास, 1 SLR, 1 देशी राइफल और 9 BGL लॉन्चर सहित कुल 19 हथियार बरामद किए गए।
कमजोर पड़ता माओवादी तंत्र
अधिकारियों ने कहा कि इन परिणामों ने स्पष्ट रूप से यह संकेत दिया है कि बस्तर में माओवादी तंत्र पूर्ण रूप से समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। यह स्थिति सुरक्षा बलों की निरंतर कार्रवाई, सुदृढ़ खुफिया समन्वय, शासन एवं विकास की बढ़ती पहुंच तथा प्रभावी आत्मसमर्पण-पुनर्वास नीति का प्रत्यक्ष परिणाम है।
