LPG घोटाले में तीन गिरफ्तार, पूर्व मंत्री का रिश्तेदार भी अरेस्ट, 1.5 करोड़ की रुपये की गैस मार्केट में बेची

RAIPUR KI BAAT
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महासमुंद: छत्तीसगढ़ के महासमुंद में हुए LPG घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने तीनों मुख्य आरोपियों जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, सहायक खाद्य अधिकारी मनीष यादव और एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर को गिरफ्तार किया है। एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर पूर्व राज्य मंत्री पूनम चंद्राकर का रिश्तेदार है।


वहीं, ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर अभी भी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। दरअसल, मामला LPG गैस की चोरी की है। ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक ने 1.5 करोड़ रुपये की LPG गैस चुराई थी। जिसकी पुलिस जांच कर रही है। पुलिस की जांच के बाद से ही संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार चल रहे हैं।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, मामला दिसंबर 2025 का है। पुलिस ने 90 मीट्रिक टन LPG ले जा रही 6 गैस कैप्सूल गाड़ियों को जब्त किया था। जांच के दौरान लीगल डॉक्यूमेंट नहीं थे। जिसके बाद से पुलिस ने सभी गाड़ियों को थाने में खड़े कर दिया। मामले की जांच हुई तो इस पूरे मामले में गैस चोरी का मामला सामने आया है। जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये थी।

गैस टैंकर थाने में खड़े रहने से किसी तरह के खतरे की आशंका थी इसलिए इन ट्रकों को सुरक्षित जगह पर रखने के लिए महासमुंद पुलिस ने जिला कलेक्टर को लेटर लिखा। इसके बाद कलेक्टर ने टैंकरों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग की टीम ने ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर से संपर्क किया और 6 कैप्सूल ट्रक सुरक्षित रखने के लिए कहा।
खाद्य विभाग की टीम की मौजूदगी में 6 कैप्सूल ट्रक सुरक्षित रखने के संतोष सिंह ठाकुर को सौंप दिए। हालांकि इस दौरान ट्रकों का वजन नहीं कराया गया जिसके बाद संतोष ठाकुर ने गैस बेचने की योजना बनाई। गैस अलग-अलग एजेंसियों और प्लांटों को बेच दी गई। बाद में संतोष ठाकुर ने प्रशासन को बताया कि गैस के टैंकर खाली हैं। जिसके बाद मामले में जांच शुरू हुई।

तीन दिन का रिकॉर्ड खंगालने पर मिला चोरी का सबूत

जांच के दौरान पुलिस ने ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के रिकॉर्ड की जांच की। तीन दिन के दस्तावेजों की जांच में पता चला कि जितनी गैस खरीदी गई थी, उससे कई गुना ज्यादा बेची गई। कंपनी ने सिर्फ 47 टन एलपीजी गैस खरीदी थी लेकिन कागजों में 107 टन गैस बेची गई। करीब 60 टन गैस ऐसी बेची गई, जो असल में खरीदी ही नहीं गई थी। इसके अलावा कच्चे रजिस्टर में भी और थोक बिक्री का रिकॉर्ड मिला है, जिससे घोटाले का पता चला।

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