25 मई 2013 का झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक-माओवादी हमलों में गिना जाता है। कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं समेत 29 लोगों की जान गई थी। जानिए आखिर हमला कहां हुआ, किसने किया, क्या मकसद था और उस दिन क्या हुआ था।
जगदलपुर: 25 मई 2013... छत्तीसगढ़ के बस्तर में कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ खत्म हो चुकी थी और नेताओं का काफिला वापस लौट रहा था। रास्ता झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान माओवादियों ने काफिले को घेरकर हमला कर दिया। कुछ ही देर में पूरा इलाका गोलियों और विस्फोटों से गूंज उठा। इस हमले में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई।
3 साल बाद, 16 सितंबर 2026 को NIA की विशेष अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों को मृत्युदंड सुनाया है। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था।
क्या था झीरम घाटी हमला ?
झीरम घाटी छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में दरभा इलाके के पास स्थित है। 25 मई 2013 को CPI (माओवादी) के सदस्यों ने कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ के काफिले पर हमला किया। NIA के रिकॉर्ड के मुताबिक हमला करीब शाम 4:15 बजे NH-221 के झीरम घाटी क्षेत्र में हुआ था।हमले में माओवादी दस्ते ने काफिले को निशाना बनाया। NIA के अनुसार 27 लोगों की मौके पर मौत हुई थी, जिनमें 10 पुलिसकर्मी शामिल थे और 38 लोग घायल हुए थे। सार्वजनिक रिपोर्टों में बाद में मृतकों की संख्या 29 बताई गई, जिसमें बाद में चोटों के कारण हुई मौतें भी शामिल हैं।
हमला किसने किया था?
जांच एजेंसी के अनुसार हमला CPI (Maoist) के सदस्यों ने किया था। NIA के मामले में इसी संगठन के सदस्यों पर काफिले पर हमले, हत्या और साजिश समेत विभिन्न अपराधों के आरोप लगाए गए।2026 में हुई सुनवाई में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया गया और 16 सितंबर को इन्हीं 10 को मृत्युदंड सुनाया गया। हालांकि आरोपपत्र में इससे अधिक लोगों के नाम आरोपी के तौर पर दर्ज थे और कुछ आरोपी फरार/वांछित बताए गए हैं।
आखिर हमला क्यों किया गया था?
हमले के उद्देश्य को लेकर जांच और सार्वजनिक रिपोर्टों में कांग्रेस के राजनीतिक नेतृत्व को निशाना बनाने की बात सामने आई है। खास तौर पर तत्कालीन कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा माओवादियों के निशाने पर बताए गए, क्योंकि वे माओवादी विरोधी सलवा जुडूम अभियान से जुड़े प्रमुख नेताओं में थे।हालांकि पूरे हमले के पीछे के उद्देश्य को एक ही कारण तक सीमित करना उचित नहीं होगा। उस समय बस्तर क्षेत्र में माओवादी हिंसा, सुरक्षा अभियानों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर तनाव पहले से मौजूद था।
विद्या चरण शुक्ल - पूर्व केंद्रीय मंत्री, हमले में गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मृत्यु हुई
कांग्रेस के कौन-कौन से बड़े नेता मारे गए?
झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेता मारे गए। इस हमले में कांग्रेस नेताओं, आम नागरिकों और 10 सुरक्षाकर्मियों समेत 29 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए थे। मारे गए लोगों में प्रमुख कांग्रेस नेताओं में...विद्या चरण शुक्ल - पूर्व केंद्रीय मंत्री, हमले में गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मृत्यु हुई
नंद कुमार पटेल - तत्कालीन छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
दिनेश पटेल - नंद कुमार पटेल के बेटे
महेंद्र कर्मा - कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष
उदय मुदलियार - कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक
इनके अलावा पार्टी कार्यकर्ता, आम नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी हमले में मारे गए।
दिनेश पटेल - नंद कुमार पटेल के बेटे
महेंद्र कर्मा - कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष
उदय मुदलियार - कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक
इनके अलावा पार्टी कार्यकर्ता, आम नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी हमले में मारे गए।
उस दिन क्या हुआ था?
कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले ‘परिवर्तन यात्रा’ निकाली थी। यात्रा के बाद नेताओं का काफिला बस्तर के रास्ते लौट रहा था। झीरम घाटी के पास माओवादियों ने काफिले को घेर लिया और हमला शुरू कर दिया। NIA के रिकॉर्ड के अनुसार हमले में हथियार और गोला-बारूद भी लूटा गया था। जांच में दो AK-47 राइफल, एक 9mm पिस्टल, हैंड ग्रेनेड और अन्य सामान के लूटे/गायब होने का उल्लेख है।जांच कैसे आगे बढ़ी?
हमले के बाद मामला पहले छत्तीसगढ़ पुलिस ने दर्ज किया। केंद्र सरकार ने इसके बाद NIA को जांच सौंपी। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार ने घटना की न्यायिक जांच के लिए तत्कालीन हाईकोर्ट जज न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में आयोग बनाया था। NIA की जांच के बाद मामला अदालत में पहुंचा और लंबे समय तक सुनवाई चलती रही। 5 सितंबर 2026 को विशेष NIA अदालत ने ट्रायल का सामना कर रहे 10 आरोपियों को दोषी ठहराया। 16 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 को मृत्युदंड सुनाया।झीरम घाटी हमला इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
झीरम घाटी हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस के एक बड़े हिस्से का नेतृत्व एक ही हमले में मारा गया था। घटना ने राज्य की राजनीति और माओवादी हिंसा के बीच संबंधों पर देशभर में चर्चा छेड़ दी थी।13 साल बाद आया अदालत का फैसला अब इस मामले की कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। मृत्युदंड के फैसले के बाद दोषियों के पास कानून के तहत उपलब्ध आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता रहेगा।
वे माओवादी जिन्हें आरोपी बनाया गया था, अब मिली फांसी
झीरम घाटी के हमले को नक्सली संगठन के टॉप लीडरों ने प्लान किया है। जानकारी के अनुसार, झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड हिडमा था। 25 मई 2013 को यह हमला हुआ था। माओवादियों ने बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र के झीरम घाटी इलाके में एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ पर घात लगाकर हमला किया था। हमला करने वाले सभी नक्सली संगठन के मेंबर थे। आरोपियों में जो शामिल थे, उनमें...- प्रमिला कोडियाम उर्फ ज्योति
- बंजामी उर्फ सन्ना
- अयाता मरकारम
- कवासी कोसा
- चौतू उर्फ मुन्ना
- कवासी
- महादेव नाग
- सुमित्रा
- मुक्का मंडावी
- मड़कामी देवा
- बता दें कि, जांच एजेंसी एनआईए ने इस मामले में लंबी और विस्तृत जांच के बाद साल 2015 में कोर्ट में करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी। इस चार्जशीट में शुरुआत में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
