Paparao Surrender: बस्तर में एक्टिव एक और टॉप नक्सली कमांडर पापाराव ने सरेंडर कर दिया है। उसके सरेंडर के बाद से माना जा रहा है कि बस्तर ‘लाल आतंकवाद’ से मुक्त हो गया है।
नक्सली का सरेंडर
जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में सक्रिय नक्सलियों के टॉप लीडर पापाराव ने मंगलवार को सरेंडर कर दिया। इसके साथ ही बस्तर में लाल आतंक का अंत माना जाने लगा। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा घोषित डेडलाइन 31 मार्च की है। पापाराव अपने साथियों के साथ AK-47 समेत अन्य हथियार लेकर बीजापुर जिले के कुटरू थाने पहुंचा जहां से उसे सुरक्षाबल के जवान जगदलपुर लेकर पहुंचे।
सामने आया वीडियो
नक्सली संगठन के टॉप लीडर पापाराव के सरेंडर का वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में पापाराव अपने 18 साथियों के साथ आगे-आगे चल रहा है। वह रहवासी बस्ती से होकर गुजरता है। सरेंडर करते जाते समय उसके चेहरे पर मुस्कान है। कंधे पर AK-47 लेकर वह आगे चल रहा है जबकि उसके साथी पीछे-पीछे चल रहे हैं।
कौन था पापाराव
पापाराव की उम्र 56 साल की है। वह बस्तर के सुकमा का रहने वाला है।
बस्तर की DKSZCM मेंबर है, बस्तर के पश्चिमी डिवीजन का इंचार्ज था।
पश्चिमी बस्तर में नक्सलवाद का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता था।
हिडमा के एनकाउंटर और देवा के सरेंडर के बाद लास्ट फाइटर था।
पापाराव के सरेंडर से पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी पूरी तरह से खत्म मानी जा रही है।
सुकमा का रहने वाला है पापाराव
पापाराव को संगठन में अलग-अलग नामों से जाना जाता था। उसे मंगू कहकर भी पुकारा जाता था। वह छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। मौजूदा समय में वह DKSZCM मेंबर है। उसके सिर पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। उसके पास नक्सली संगठन में अहम जिम्मेदारी थी। वह पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है।
पापाराव करीब 25 सालों तक संगठन से जुड़ा रहा। सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उसने सरेंडर करने का फैसला किया। वह अपनी सुरक्षा के लिए हमेशा अपने साथ AK-47 राइफल रखता है। पापाराव के बारे में कहा जाता है कि उसे बस्तर के जंगल और जमीन के हर कोने से परिचित है। यहां कारण है कि सुरक्षाबल के जवानों से वह 25 साल तक बचता रहा।
सरेंडर पर क्या बोले डेप्युटी सीएम
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, “नक्सली पापा राव के साथ कुल 18 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और उनका पुनर्वास किया गया है, जिनमें 10 पुरुष और 8 महिलाएं शामिल हैं। 8 AK-47, 1 SLR, 1 INSAS और ऐसे ही अन्य हथियार बरामद किए गए हैं। इसके बाद, हम तकनीकी रूप से यह कह सकते हैं कि पूरा माओवादी नेतृत्व खत्म हो चुका है और छत्तीसगढ़ अब ‘लाल आतंक’ से मुक्त है। नक्सली पापा राव पर 25 लाख रुपये का इनाम था; उनके आत्मसमर्पण के बाद, छत्तीसगढ़ में इस स्तर का कोई भी नक्सली सक्रिय नहीं रहेगा और छत्तीसगढ़ में सशस्त्र नक्सलवाद जल्द ही समाप्त हो जाएगा।”
