Ashtami Navami Kanya Pujan Niyam: नवरात्रि में अष्टमी और नवमी को बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। मां का स्वरूप मानकर कन्याओं को हलवा, पूड़ी और चने का भोजन कराने की परंपरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन में कन्याओं की संख्या कितनी होनी चाहिए।
Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान नवरात्रि के अंतिम दो दिनों अष्टमी और नवमी का अधिक महत्व माना गया है। इन दोनों दिनों पर कन्या पूजन का विशेष महत्व माना गया है। कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। उनको भोजन कराया जाता है और यथा शक्ति उपहार भेंट किया जाता है। ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि कन्या पूजन में कन्याओं की संख्या और उनकी उम्र कितनी होनी चाहिए। आइए विस्तार से पं. राकेश झा से जानते हैं।
कन्या पूजन में कितनी कन्याएं होनी चाहिए?
नवरात्रि में अष्टमी और नवमी का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के अंतिम दो दिनों में कन्या पूजन यानी कंजक पूजी जाती है। 9 कन्याओं को मां दुर्गा का 9 स्वरूप मानकर उनकी पूजा करने की परंपरा है। ऐसे में अगर अष्टमी या नवमी के दिन 9 कन्याएं न मिले तो आप विषम संख्या 3, 5 या 7 कन्याओं को लेकर भी कन्या पूजन कर सकते हैं। अगर तीन कन्या भी नहीं मिले तो क्या करें? तो फिर इस स्थिति में आप एक कन्या का भी पूजन कर सकते हैं। इससे आपको पूजा का पूर्ण फल ही प्राप्त होगा। कन्या पूजन में एक बटुक भैरव को भी आमंत्रित करना शुभ माना जाता है।
कन्या पूजन में कितनी कन्या होनी चाहिए?
अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन के लिए 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को सबसे उत्तम माना जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार, इस उम्र की कन्याओं को मां दुर्गा का नौ स्वरूप माना जाता है। इसमें दो वर्ष की कन्या को कुमारी, तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कन्या को कल्याणी, पांच वर्ष की कन्या को रोहिणी, छह वर्ष की कन्या को कालिका, सात वर्ष की कन्या को चंडिका, आठ वर्ष की कन्या को शांभवी, नौ वर्ष की कन्या को दुर्गा और दस वर्ष की कन्या को सुभद्रा मान कर पूजा की जाती है।
कन्या पूजन मंत्र और फल
दो वर्ष की कन्या कुमारी कुमार्यै नम: दुःख और दरिद्रता दूर करने वाली
तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति त्रिमूर्तये नम: धन, धान्य और घर में शांति लाने वाली
चार वर्ष की कन्या कल्याणी कल्याण्यै नम: कल्याण और सुख-समृद्धि देने वाली
पांच वर्ष की कन्या रोहिणी रोहिण्यै नम: स्वास्थ्य और आरोग्य देने वाली
छह वर्ष की कन्या कालिका कालिकायै नम: शत्रुओं पर जीत दिलाने वाली
सात वर्ष की कन्या चंडिका चंडिकायै नम: ऐश्वर्य और धन प्रदान करने वाली
आठ साल की कन्या शांभवी शांभव्यै नम: सफलता और शत्रुओं का नाश करने वाली
नौ वर्ष की कन्या दुर्गा दुर्गायै नम: मनोकामना पूर्ण करने वाली
दस वर्ष की कन्या सुभद्रा सुभद्रायै नम: शक्ति और मोक्ष प्रदान करने वाली
अष्टमी और नवमी कन्या पूजन की विधि
सबसे पहले कन्याओं को प्रेम पूर्वक अपने घर पर आमंत्रित करें।
कन्याओं के पैर धोकर उन्हें साफ आसन पर बैठाएं।
माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएं।
अब उनके दाहिने हाथ में कलावा बांधें।
इसके बाद कन्याओं को हलवा, पूड़ी और काले चने का भोजन कराएं।
भोजन के बाद अपनी क्षमता के अनुसार उपहार और दक्षिणा दें।
आखिर में उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें और माता के जयकारे लगाकर आदर पूर्वक विदा करें।
